By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept

K News 18

Latest & Breaking News Updates In Hindi

  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • मध्यप्रदेश
    • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
  • छत्तीसगढ़
    • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
  • राजनीती
  • धर्म
  • अन्य खबरें
    • मनोरंजन
    • खेल
    • तकनीकी
    • व्यापार
    • करियर
    • लाइफ स्टाइल
Search
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Reading: पहाड़ों में बर्मा के बिना अधूरा माना जाता है शुभ कार्य, जानें 108 तिनकों से बने देवताओं के इस पवित्र आसन का रहस्य
Share
Sign In
Notification Show More
Font ResizerAa

K News 18

Latest & Breaking News Updates In Hindi

Font ResizerAa
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • राजनीती
  • धर्म
  • अन्य खबरें
Search
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • मध्यप्रदेश
    • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
  • छत्तीसगढ़
    • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
  • राजनीती
  • धर्म
  • अन्य खबरें
    • मनोरंजन
    • खेल
    • तकनीकी
    • व्यापार
    • करियर
    • लाइफ स्टाइल
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
K News 18 > Blog > धर्म > पहाड़ों में बर्मा के बिना अधूरा माना जाता है शुभ कार्य, जानें 108 तिनकों से बने देवताओं के इस पवित्र आसन का रहस्य
धर्म

पहाड़ों में बर्मा के बिना अधूरा माना जाता है शुभ कार्य, जानें 108 तिनकों से बने देवताओं के इस पवित्र आसन का रहस्य

News Desk
Last updated: 2026/02/02 at 6:45 AM
News Desk
Share
4 Min Read
पहाड़ों में बर्मा के बिना अधूरा माना जाता है शुभ कार्य, जानें 108 तिनकों से बने देवताओं के इस पवित्र आसन का रहस्य
SHARE

पहाड़ों में पूजा-पाठ सिर्फ एक धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह यहां के जीवन जीने का एक तरीका है. यहां हर पूजा पूरी परंपरा, कड़े नियम और गहरी श्रद्धा के साथ संपन्न की जाती है. पहाड़ी संस्कृति में एक ऐसी चीज़ है, जिसके बिना कोई भी पूजा या अनुष्ठान पूरा नहीं माना जाता और वह है ‘बर्मा’. भले ही आज की पीढ़ी आधुनिक हो रही हो, लेकिन पहाड़ों में बर्मा का महत्व आज भी वैसा ही है जैसा सदियों पहले था. इसके बिना न तो देवताओं की स्थापना होती है और न ही पितरों का कार्य संपन्न होता है.

जानिए क्या है कूश जिससे बनता है बर्मा
बर्मा को ‘कूश’ कुशा या कहीं-कहीं पर कुश भी कहा जाता है. जो एक पवित्र पौधा (घास) होता है, उससे बर्मा को तैयार किया जाता है. हिंदू धर्म शास्त्रों में कूश को सबसे शुद्ध घास माना गया है. ऐसी मान्यता है कि कूश में नकारात्मक ऊर्जा को सोखने और वातावरण को पवित्र करने की अद्भुत शक्ति होती है. यही कारण है कि इसका उपयोग सिर्फ देवताओं की पूजा में ही नहीं, बल्कि श्राद्ध, तर्पण और पितृ कार्यों में भी अनिवार्य रूप से किया जाता है. बिना कूश के किसी भी मंत्र का प्रभाव वैसा नहीं रहता जैसा होना चाहिए.
108 तिनकों का नियम और मंत्रों की शक्ति
बर्मा बनाने की प्रक्रिया भी अपने आप में बहुत अनोखी और नियमों से बंधी होती है. इसे बनाने के लिए कूश के ठीक 108 तिनकों का इस्तेमाल किया जाता है. हिंदू धर्म में 108 की संख्या का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है, इसीलिए बर्मा में भी इतने ही तिनके रखे जाते हैं. इन्हें मंत्रोच्चारण के साथ एक खास तरीके से आपस में पिरोया या जोड़ा जाता है. इस काम को अक्सर घर के बुजुर्ग या कोई विद्वान पंडित ही करते हैं, ताकि विधि में कोई चूक न हो जाए.
देवताओं का आसन है बर्मा
इस परंपरा के बारे में बताते हुए पंडित बलदेव दत्त भट्ट बताते हैं कि बर्मा को सिर्फ कूश की बनी एक वस्तु समझना गलत होगा. असल में यह ‘देवताओं का आसन’ माना जाता है. पूजा के समय बर्मा के माध्यम से ही देवी-देवताओं का आवाहन (बुलावा) किया जाता है और उन्हें स्थान दिया जाता है. पंडित जी के अनुसार, बिना बर्मा के की गई पूजा अधूरी रहती है और जातक को उसका पूरा फल प्राप्त नहीं होता. यह देव कार्य और पितृ कार्य दोनों के बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी है.
हर शुभ कार्य में बर्मा है जरूरी
पहाड़ों में शायद ही ऐसा कोई मांगलिक कार्य हो जहां बर्मा न दिखे. घर की छोटी-मोटी पूजा से लेकर बड़े हवन, यज्ञ और विवाह संस्कारों तक, बर्मा की मौजूदगी अनिवार्य है. लोगों का अटूट विश्वास है कि बर्मा के बिना किया गया कोई भी शुभ कार्य सिद्ध नहीं होता. इसी विश्वास के कारण आज भी पहाड़ों के हर गांव और हर घर में यह परंपरा जीवित है.
घरों में सहेज कर रखा जाता है बर्मा
पहाड़ी घरों में लोग बर्मा को बड़े ही सम्मान और सावधानी के साथ सहेज कर रखते हैं. इसे किसी साफ और ऊंचे स्थान पर रखा जाता है. जब भी घर में कोई पूजा होती है, बर्मा को निकालकर विधि-विधान से उसे स्थापित किया जाता है. बुजुर्गों का मानना है कि घर में बर्मा का होना सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है. यह सिर्फ घास के तिनकों का गुच्छा नहीं, बल्कि हमारी सदियों पुरानी पहाड़ी संस्कृति और अटूट आस्था का प्रतीक है.

 

You Might Also Like

पंचांग : आज की तिथि में छिपा है अच्छी सेहत का राज! जानें चिकित्सा कार्यों के लिए क्यों है यह सबसे उत्तम दिन

राशिफल: आज की एक छोटी सी शांति दिलाएगी बड़ी सफलता! जानें सोमवार को आपके भाग्य के सितारे क्या इशारा कर रहे हैं

जागरण से जागेगा सौभाग्य, भोलेनाथ देंगे मनचाहा वरदान, जानें महाशिवरात्रि की 4 प्रहर पूजा का विशेष फल

गुमला में यहां 2,000 फीट की ऊंचाई पर बसते हैं बाबा वैद्यनाथेश्वर, रामायण काल से जुड़ी है मान्यता

गुमला में यहां 2,000 फीट की ऊंचाई पर बसते हैं बाबा वैद्यनाथेश्वर, रामायण काल से जुड़ी है मान्यता

News Desk February 2, 2026 February 2, 2026
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Previous Article जागरण से जागेगा सौभाग्य, भोलेनाथ देंगे मनचाहा वरदान, जानें महाशिवरात्रि की 4 प्रहर पूजा का विशेष फल जागरण से जागेगा सौभाग्य, भोलेनाथ देंगे मनचाहा वरदान, जानें महाशिवरात्रि की 4 प्रहर पूजा का विशेष फल
Next Article राशिफल: आज की एक छोटी सी शांति दिलाएगी बड़ी सफलता! जानें सोमवार को आपके भाग्य के सितारे क्या इशारा कर रहे हैं राशिफल: आज की एक छोटी सी शांति दिलाएगी बड़ी सफलता! जानें सोमवार को आपके भाग्य के सितारे क्या इशारा कर रहे हैं
- Advertisement -
Ad imageAd image
- Advertisement -
Ad imageAd image

Stay Connected

235.3k Followers Like
69.1k Followers Follow
11.6k Followers Pin
56.4k Followers Follow
136k Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow

ताजा ख़बरें

प्राकृतिक ऊर्जा से रोशन हो रहा प्रवीण शुक्ला का घर, बिजली बिल में हो रही उल्लेखनीय आर्थिक बचत…..
प्राकृतिक ऊर्जा से रोशन हो रहा प्रवीण शुक्ला का घर, बिजली बिल में हो रही उल्लेखनीय आर्थिक बचत…..
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
महतारी वंदन से आर्थिक रूप से सशक्त हुई महिलाएं: सहायता राशि से सिलाई मशीन खरीद श्रीमती भगवती रात्रे बनी आत्मनिर्भर…..
महतारी वंदन से आर्थिक रूप से सशक्त हुई महिलाएं: सहायता राशि से सिलाई मशीन खरीद श्रीमती भगवती रात्रे बनी आत्मनिर्भर…..
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
धान खरीदी: किसानों के हित में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर अतिरिक्त दो दिवस धान खरीदी की व्यवस्था….
धान खरीदी: किसानों के हित में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर अतिरिक्त दो दिवस धान खरीदी की व्यवस्था….
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 37वीं फेडरेशन कप व्हॉलीबॉल चैंपियनशिप का किया उद्घाटन….
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 37वीं फेडरेशन कप व्हॉलीबॉल चैंपियनशिप का किया उद्घाटन….
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
//

यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

संपादक - Pragya Telang
मोबाइल - 7999882386
ईमेल - [email protected]
कार्यालय - G2 Amrit Niwas , Gandhi Nagar , Gudhiyari , Raipur , Chhattisgarh
February 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
232425262728  
« Jan    
Follow US
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
  • Home
  • About Us
  • Contact Us
  • MP Info RSS Feed
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?